🌼मानव जीवन का मूलभूत आधार संस्कार🌼
संस्कार मनुष्य जीवन की आधार शैली है। संस्कार जीवन का अस्तित्व है जो कि जीवन के प्रारंभ से ही हमारे साथ होते हैं। मानव को सही पथ पर अग्रसर करने में संस्कार की अहम भूमिका होती है। संस्कारों के माध्यम से मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण एवं विकास होता था । जीवन के प्रत्येक चरण में संस्कार मार्ग दर्शन का काम करते थे। संस्कारों के द्वारा मनुष्य के जीवन में नैतिक गुणों का समावेश होता था। संस्कार माता-पिता तथा परिवार के सदस्यों के द्वारा बच्चों को दिए जाते हैं जो कि मनुष्य के जीवन का आधार बनते हैं।
संस्कारो का पतन💥
आज का युग आधुनिकता का युग है, जहां तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हो रही है लेकिन इस तकनीकी के चलते बच्चों में संस्कारों का पतन हो रहा है क्योंकि जहां तकनीकी से हमें काफी सुविधाएं मिल रही हैं वहीं दूसरी तरफ इस तकनीकी से बच्चे अपने माता-पिता का सम्मान करना भूल चुके हैं क्योंकि फिल्म को देखकर बच्चे आज नशा करना, माता-पिता से झूठ बोलना तथा कई तरह की बुराइयों को ग्रहण कर चुके हैं, इस सब का बुरा असर आज की युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति को ग्रहण करके माता-पिता से दूरी बना ली है। संस्कारों का हनन होने से युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकार की ओर जा रहा है। हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनकी संतान चरित्रवान हो लेकिन इस आधुनिक युग में युवा पीढ़ी के चरित्र का हनन हो रहा है।
प्रत्येक माता-पिता की तमन्ना होती है कि मेरी संतान योग्य बने। समाज में बदनामी न ले। अच्छे चरित्रा वाली हो, आज्ञाकारी हो। वृद्धावस्था में हमारी सेवा करे।
आज के इस आधुनिक युग में सिर्फ संत रामपाल जी महाराज ही एक ऐसे संत हैं जिनके तत्वज्ञान के आधार पर आज की युवा पीढ़ी में सुधार हो रहा है तथा युवा पीढ़ी को अपने जीवन के मूल्य उद्देश्य का पता चल रहा है, संत रामपाल जी महाराज के बताए गए मार्ग से युवा पीढ़ी ने नशा करना, झूठ बोलना, फिल्में देखना, अश्लील गाने सुनना इन सारी बुराइयों को छोड़ दिया है।
👉 संत रामपाल जी महाराज के द्वारा लिखित पवित्र पुस्तक "जीने की राह" को पढ़कर आज लाखों परिवारों का जीवन सुधर चुका है तो आप भी इस पुस्तक को जरूर पढ़ें।